ब्रिटिश व उपनिवेशकालीन भारतीय अर्थव्यवस्था

ब्रिटिश व उपनिवेशकालीन भारतीय अर्थव्यवस्था

  • आजादी के बाद नियोजन काल मे भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप संक्षिप्त
  • मिश्रित अर्थव्यवस्था,समाजवादी अर्थव्यवस्था पूंजीवादी अर्थव्यवस्था व अन्य
  • विकसित,अल्पविकसित व विकासशील अर्थव्यवस्था
  • अर्थव्यवस्था के आर्थिक व अनार्थिक तत्व

राष्ट्रीय आय का लेखांकन

  • राष्ट्र की आर्थिक सीमा
  • राष्ट्रीय उत्पाद व देशीय उत्पाद,निवल राष्ट्रीय व देशीय उत्पाद
  • औघोगिक वर्गीकरण, प्रति व्यक्ति आय
  • राष्ट्रीय आय के आकलन की विधिया जैसे उत्पादन विधि आय विधि, व्यय विधी
  • राष्ट्रीय आय की अवधारणाए जैसे- GDP-gNP आदि
  • हिंदू वृद्धि दर, विकास व संवृद्धि 1991 की आर्थिक नीति उदारीकरण
  • केंद्रिय सांख्यिकीय संगठन, आधार वर्ष आदि

राष्ट्रीय आय की अवधारणा

राष्ट्रीय आय एक लेखा वर्ष की अवधि के दौरान एक देश के सामान्य निवासियों द्वारा अर्जित कारक आय (अपनी कारक सेवाओं को देने के बदले प्राप्त पुरस्कार) का कुल जोड़ है।

. राष्ट्रीय आय की इस परिभाषा में दो महत्वपूर्ण शब्द शामिल हैं अर्थात् कारक आय, एक देश के सामान्य निवासी

ब्रिटिश व उपनिवेशकालीन भारतीय अर्थव्यवस्था

1-कारक आय : –

आय को व्यापक रूप से कारक आय/ कारक भुगतानो तथा हस्तनातरण आय / भुगतानो मे बाटा गया है।

  • भूमि
  • श्रम
  • पूँजी
  • उधमवृति

हस्तनातरण आय

किसी भी सेवा का प्रयोग करने के फलसवरूप प्राप्त पुरस्कार नहीं है

यह एक पछिय – भुगतान है EX- दान, अनुदान आदि ।

2-सामान्य निवासी :-

सामान्य निवासी कौन हैं?

  • ये वे निवासी हैं जो सामान्य रूप से संबंधित देश में निवास करते हैं और जिनकी आर्थिक रूचि संबंधित देश में केंद्रित होती है।
  • यह ध्यान देने योग्य है कि यह आवश्यक नहीं है कि सामान्य निवासी उसी देश के नागरिक भी हों।
  • भारत के सामान्य निवासी भारत में स्थित विदेशी दूतावासों में काम करने वाले भारतीय।
  • भारत में स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन में काम करने वाले भारतीय
  • . भारत में स्थित अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के कार्यालय में काम करने वाले स्थानीय लोग।
  • . शेष विश्व में भारत का राजदूत भारत में एक वर्ष से अधिक की अवधि के लिए रह रहे विदेशी नागरिक (अध्ययन तथा चिकित्सा के लिए आए व्यक्तियों के अतिरिक्त)

भारत के गैर-निवासी

  • कनाडा और जापान में स्थित भारतीय ट्रतावासों में काम करने वाले विदेशी भारत में स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन में काम करने वाले विदेशी
  • भारत में स्थित अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के कार्यालय में काम करने वाले जर्मन निर्देशक
  • . भारत में शेष विश्व का राजदूत
  • . एक वर्ष से कम की अवधि के लिए भारत में काम कर रहे विदेशी तकनीकी विशेषज्ञ

एक देश की घरेलू सीमा

  • सामान्य भाषा में एक राष्ट्र की घरेलू सीमा का अर्थ देश की राजनीतिक सीमाओं के अंदर के भू-भाग से लिया जाता है।
  • परंतु अर्थशास्त्र में घरेलू सीमा शब्द का प्रयोग विस्तृत अर्थों में किया जाता है। इसमें निम्नलिखित को सम्मिलित किया जाता है
  • राजनीतिक सीमाओं का भू-भाग जिसमें देश की सामुद्रिक सीमा भी सम्मिलित होती है।
  • मछली पकड़ने की नौकायें, तेल व अप्राकृतिक गैस यान तथा तैरते हुए प्लेटफार्म जो अंतर्राष्ट्रीय जल . सीमा में या उस सीमा में देश के निवासियों द्वारा चलाए जाते हैं जिनमें देश को तेल खोजने का एकमात्र अधिकार है।

उदाहरण के लिए, भारतीय मछुआरों द्वारा मछली पकड़ने की नौकाओं को हिंद महासागर के अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग में चलाना, भारत की घरेलू सीमा का अंग है।

  •  एक देश के विदेशी में स्थित दूतावास, वाणिज्य दूतावास तथा सैनिक प्रतिष्ठान।

उदाहरण के लिए अमेरिका में भारतीय द्रतावास, भारत की घरेलू सीमा का अंग है तथा भारत में अमेरिका का दूतावास अमेरिका की घरेलू सीमा का अंग है।

घरेलू आय का राष्ट्रीय आय में परिवर्तन

घरेलू आय एक लेखा वर्ष के दौरान एक देश की घरेलू सीमा में सृजित कारक आय का कुल जोड़ है।

इसमें एक देश की घरेलू सीमा में गैर-निवासियों द्वारा सृजित कारक आय शामिल होती है (जो राष्ट्रीय आय का एक अंग नहीं है, क्योंकि यह हमारे निवासियों से संबंधित नहीं है)

घरेलू आय = रास्तरीय आय – विदेशो से प्राप्त शुद्ध कारक आय

राष्ट्रीय आय लेखांकन (National Income Account)

राष्ट्रीय आय से संबंधित समस्याओं के अध्ययन तथा इनसे संबंधित सभी सूचनाओं तथा तथ्यों को सांख्यिकीय विवरणों तथा खातों के रूप में प्रदर्शित करने का तरीका है।

  • साइमन कुजनेट्स को इसका जन्मदाता माना जाता है, जिन्हें इसीलिए 1971 अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला।
  • रिचर्ड स्टोन को भी इसी के लिए 1984 में नोबेल पुरस्कार दिया गया।

नोट-

  • वस्तु अंतिम है या माध्यमिक, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वह वस्तु उत्पादन क्रिया में प्रयोग में आ रही है (माध्यमिक ) या उपभोग के लिए प्रयोग में आ रही है।
  • एक ही वस्तु किसी स्थिति में अन्त्य होगी तो दूसरी स्थिति में माध्यमिक हो सकती है।

Ex. बेकरी में ब्रेड बनाने में प्रयोग में आने वाला आटा माध्यमिक वस्तु है।

  • जबकि घर में रोटी बनाने में प्रयोग आने वाला आटा उपभोग वस्तु (अन्त्य) है।

केंद्रीय सांख्यिकी आयोग

केंद्रीय सांख्यिकी आयोग का गठन – 2 मई 1951

 प्रमुख कार्य – भारत की राष्ट्रीय आय की गणना करना

cso द्वारा समाकलित राष्ट्रीय आय एवं संबंधित तथ्य राष्ट्रीय आय के तीन आयामों पर प्रकाश डालते हैं

  • 1.देशीय उत्पाद
  • 2.आय के रूप में इसका वितरण
  • 3. अंतिम उपभोग एवं पूंजी निर्माण के रूप में इसका उपयोग

राष्ट्रीय आय की माप में वड़ा परिवर्तन

  • राष्ट्रीय आय के मापन में वर्ष 2004-05 के बजाय वर्ष 2011-12 को आधार वर्ष माना गया है।
  • इसके बाद GDP के स्थान पर GVA (Gross Vats Added) की गणना की जाने लगी।
  • किन्तु अव पुनः GDP की गणना की जाने लगी है।

घरेलू आय तथा घरेलू उत्पाद

समरूप अवधारणायें

  • . घरेलू आय तथा घरेलू उत्पाद, इन दोनों अवधारणाओं में कोई अंतर नहीं है।
  • . उत्पाद’ का अर्थ मूल्य वृद्धि से है जवकि ‘आय’ शब्द अभिप्राय सृजित आय से है।
  • मूल्य वृद्धि सृजित आय के समरूप है।

उत्पाद क्षेत्र एवं परिवार क्षेत्र

  • उत्पाद क्षेत्र परिवार क्षेत्र (जो उत्पादन के कारकों के स्वामी हैं) से कारक सेवाओं को भाड़े पर लेता/खरीदता है।
  • उत्पादक क्षेत्र वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करता है तथा इन्हें वेचकर आय प्राप्त करता है।
  • . आय प्राप्तियों बाजार में उत्पादन के मूल्य के बराबर होती है

मूल्य वृद्धि = उत्पादन का मूल्य – मध्यवर्ती उपभोग का मूल्य (उत्पादन में प्रयोग होने वाली मध्यवर्ती वस्तुयें जो मूल रूप से कच्चे माल से संबंधित होती हैं)

मूल्य वृद्धि उत्पादन के कारकों (भूमि, श्रम, पूँजी तथा उद्यमवृत्ति) के सामूहिक प्रयासों के कारण होती है।

घरेलू उत्पाद की सकल तथा शुद्ध अवधारणायें

  • घरेलू उत्पाद को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) या शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDP) के रूप में मापा जाता है।
  • मूल्य हास के कारण इन दोनों में अंतर होता है।
  • . GDP में मूल्य हास शामिल होता है जबकि NDP में नहीं।

बाजार कीमत पर घरेलू उत्पाद = जब घरेलू उत्पाद का (देश की घरेलू सीमा में) सभी उत्पादक इकाईयों द्वारा की गई मूल्य वृद्धि के कुल जोड़ के रूप में आकलन किया जाता है

कारक लागत पर घरेलू उत्पाद – जव घरेल उत्पाद का सृजित कारक आय  एक देश की घरेलू सीमा के अंदर) के कुल जोड के रूप में आकलन किया जाता है

इसी प्रकार

  • बाजार कीमत पर राष्ट्रीय उत्पाद = अप्रत्यक्ष कर + आर्थिक सहायता
  • कारक लागत पर राष्ट्रीय उत्पाद = बाजार कीमत पर राष्ट्रीय उत्पाद – शुद्ध अप्रत्यक्ष कर

(बाजार कीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद) NDP MP

NDP [MP] (वाजार कीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद) से अभिप्राय एक लेखा वर्ष की (अवधि के दौरान एक देश की घरेलू सीमा के अंदर सभी उत्पादक इक दारा उत्पादित की गई अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं के बाजार मूल्य से है, जिसमें मूल्य हास शामिल नहीं होता है।

 (कारक लागत पर सकल घरेलू उत्पाद)

  • कारक लागत पर सकल घरेलू उत्पाद) से अभिप्राणु एक लेखा वर्ष की अवधि के दौरान एक देश की घरेलू सीमा के अंदर सृजित कारक आय (अर्थात् कर्मचारि कुल जोड़ से है। rent व्याज, लाभ) के कुल जोड़ से है ।

इसमें मूल्य हास (स्थिर पूँजी का उपभोग) शामिल होता है। अथवा

GDP FC = कर्मचारियों का पारिश्रमिक + Rent + ब्याज + लाभ मूल्य हास (स्थिर पूँजी का उपभोग),

मौद्रिक तथा वास्तविक GDP

  • मौद्रिक तथा वास्तविक GDP का अनुमान चालू कीमतों पर तथा स्थिर कीमत पर लगाया जा सकता है।
  • चाल कीमतों पर GDP के आकलन को मौद्रिक जीडीपी Nominal GDP) कहते हैं जबकि स्थिर कीमतों पर GDP के आकलन को वास्तविक जीडीपी Real GDP) कहते हैं।

मौद्रिक जीडीपी

  • चालू कीमतों पर जीडीपी एक लेखा वर्ष के दौरान देश की घरेलू सीमा में उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं का बाजार मूल्य है।
  • . इसका अनुमान चालू वर्ष की कीमतों का प्रयोग करके लगाया जा है।
  • चालू वर्ष की कीमतों से अभिप्राय तुलना वाले वर्ष में प्रचलित कीमतों है। अतः = मौद्रिक GDP = Q x P

(Q= एक लेखा वर्ष के दौरान उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं की मात्रा

p=लेखा वर्ष के दौरान प्रचलित मूल्य

वास्तविक जीडीपी (Real GDP) 

  • स्थिर कीमतों पर जीडीपी एक लेखा वर्ष के दौरान एक देश की घरेलू सीमा में उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं का बाजार मूल्य है।
  • इसका अनुमान आधार वर्ष की कीमतों का प्रयोग करके लगाया जाता है।
  • आधार वर्ष, तुलना का वर्ष है जब विश्वास किया जाता है कि समष्टि चर (जैसे- उत्पादन तथा सामान्य कीमत स्तर) अपनी सामान्य सीमा के इर्द-गिर्द घूमतें रहते हैं।

Note- मौद्रिक जीडीपी में वृद्धि हो सकती है, जब कीमत बढ़ती है, उत्पादन स्थिर रहता है।

Note- वास्तविक जीडीपी तभी बड़ता है जब उत्पादन की मात्रा बढती है।

  • चालू कीमतों पर जीडीपी जिसे मौद्रिक जीडीपी कहते है से अभिप्राय एक लेखा वर्ष के दौरान एक देश की घरेलू सीमा मे उत्पादित अंतिम वस्तुओ तथा सेवाओ के बाज़ार मूल्य से है , जिसका अनुमान चालू वर्ष की कीमतों पर लगाया जाता है ।
  • इसमे वृद्धि , अर्थव्वसथा मे उत्पाद की मात्रा मे बिना किसी वृद्धि के हो सकती है ।
  • स्थिर कीमतों पर जीडीपी (जिसे वास्तविक जीडीपी भी कहते हैं) से अभिप्राय एक लेख वर्ष के दौरान एक देश की घरेलू सीमा में उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं के बाजार मूल्य से है, जिसका अनुमान आधार वर्ष की कीमतों पर लगाया जाता है।
    • इसमें वृद्धि केवल तब होती है जब अर्थव्यवस्था में उत्पादन की मात्रा में वृद्धि होती है।
  • वास्तविक जीडीपी सूचकांक सदैव उत्पादन के स्तर में परिवर्तन को दर्शाता है जबकि मौद्रिक जीडीपी सूचकांक उत्पादन के स्तर पर में परिवर्तन को दर्शा भी सकता है और नहीं भी।
  • इसलिए मौद्रिक जीडीपी की तुलना में वास्तविक जीडीपी आर्थिक संवृद्धि का एक बेहतर सूचकांक है।

जीडीपी अपस्फायक (GDP Deflator)

. इससे अभिप्राय चालू कीमतों पर जीडीपी तथा स्थिर कीमतों पर जीडीपी के अनुपात से है।

. यह कीमत स्तर में परिवर्तन के कारण जीडीपी में परिवर्तन को दर्शाता है।

इसे निम्न प्रकार से व्यक्ति किया जाता है

जीडीपी अपस्फायक – चालू कीमतों पर जीडीपी / स्थिर कीमतों पर जीडीपी  x 100

जीडीपी तथा कल्याण –

  • जीडीपी को अक्सर लोगों के कल्याण का सूचक माना जाता है। जीडीपी (वास्तविक जीडीपी न कि मौद्रिक जीडीपी) में वृद्धि का अर्थ है लोगों के कल्याण के स्तर में वृद्धि।
  • . जब वास्तविक जीडीपी में वृद्धि होती है, तब वस्तुओं सेवाओं के प्रवाह में भी वृद्धि होती है।
  • . इसका अर्थ है = प्रति व्यक्ति वस्तुओं की अधिक उपलब्धता कल्याण का उच्च स्तर

भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकार 

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस 

महिला सशक्तिकरण एवं इसका अर्थ 

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