बौद्ध धर्म महात्मा बुद्ध (Mahatma Buddha)

बौद्ध धर्म महात्मा बुद्ध

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◆ इनका जन्म 563 ई पू. में शाक्य गणराज्य की राजधानी कपिल वस्तु से 14 मील दुर लुम्बिनी नामक वन में हुआ।

◆ वर्तमान में यह स्थान रूम्मदेई (नेपाल) कहलाता है।

◆ इनके पिता का नाम शुद्धोधन तथा माता का नाम महामाया था।

◆ जन्म के सात दिन पश्चात् ही इनकी माता महामाया का निधन हो गया तथा इनका पालन पोषण इनकी मौसी प्रजापति गौतमी ने किया इसी वजह से ये गौतम कहलाये।

◆ इनके जन्म पर कोण्डिन्थ तथा कालदेव ने भविष्यवाणी की थी कि या तो ये चक्रवर्ती सम्राट होगे अन्यथा एक महान सन्सासी।

◆ इनका विवाह 16 वर्ष की आयु में यशोधरा (बिम्बा,भद्रा,भद्रकछा) से हुआ तथा इन्हें राहुल नामक पुत्र की प्राप्ति हुई।

◆ इनके मन सांसारिक कार्यो में नहीं था।

◆ इनके जीवन पर 4 घटनाओं का प्रभाव पड़ा।

  1. बुद्ध व्यक्ति    2. बीमार व्यक्ति     3. अर्थी पर लेटा हुआ मनुष्य तथा  4. सन्यासी

◆ इनके सारथि का नाम चन्न तथा घोड़े का नाम कंथक था।

◆ बौद्ध साहित्य में यह घटना महर्षि निष्क्रमण कहलाती है।

◆ इसके पश्चात् अलार कलाम इनकें प्रथम गुरू बने जो कि संख्या दर्शन के ज्ञाता थे।

◆ अलार कलाम से उन्होनें उपनिषदों की शिक्षा ग्रहण की।

◆ इनके दूसरे गुरू रूद्रकरामपुत थे जिन्होनें राजग्रह में बुद्ध को योग की शिक्षा प्रदान की।

◆ इसके पश्चात् 5 अन्य ब्राह्मणों के साथ उरूवेला नाम स्थान पर नियंत्रण नदी के किनारे मुड़ेश्वरी पहाड़ी पर 6 वर्ष तक तपस्या की।

◆ एक दिन नृतकियों का नृत्य देखकर ये मध्यम मार्ग की ओर प्रेरित हुए।

◆ सुजाता नामक स्त्री से खीर खाकर बौद्ध गया में पीपल के वृक्ष के नीचे साधना लीन हो गये।

◆ 49 दिनों की तपस्या के पश्चात् इन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई।

◆ ज्ञान की प्राप्ति होने की वजह से ये बुद्ध कहलाये तथा सत्य की प्राप्ति करने की वजह से तथागत तथा शाक्यों  के गुरू होने के कारण शाक्यमूनि कहलाये।

◆ सर्वप्रथम इन्होनें तपस्यू व मल्लि नामक दो बंजारों को उपदेश दिये।

◆ इसके पश्चात् वे ऋषिपतन (सारनाथ) गये तथा कौडिण्य सहित पांचों ब्राह्मण जिन्होनें उनके साथ तपस्या की थी को बौद्ध धर्म में दीक्षित किया, सही घटना धर्मचक्र प्रवर्तन कहलाती है।

◆ बुद्ध का जन्म धर्म चक्रप्रवर्तन तथा महापरिनिर्वाण वैशाख पूर्णिमा के दिन ही हुए है।

◆ सारनाथ में ही बौद्ध धर्म का प्रथम संघ बनाया गया।

◆ इसके पश्चात् बाराणसी में यश नामक श्रेष्ठि को बौद्ध धर्म में दीक्षित किया।

◆ मगध की राजधानी राजगृह से बिम्बिसार ने बौद्ध धर्म ग्रहण किया तथा वेणुवन दान में दिया।

◆ सारिपुत्र मौदग्लायन, उपालि तथा अभय भी इसी समय बौद्ध धम्र में दीक्षित हुए।

◆ कपिलवस्तु  में इन्होने आनन्द को अपना शिष्य बनाया।

नोट:- आनंद शाक्य कुल सेे सम्बंधित थे।

◆ इसके पश्चात् गणराज्य संघ के प्रमुख लिच्छिवियों के वंशाली साम्राज्य में गये तथा आनन्द के कहने पर प्रथम बार संघ में महिला भिक्षुणियों को प्रवेश की इजाजत दी।

◆ प्रजापति गौतमी प्रथम तथा वैशाली की नगर वधू आम्रपांली इनकी द्वितीय शिष्या बनी।

◆ इसके पश्चात् कौशाम्बी में घोषिताराम महाविहार का निर्माण कराया गया।

◆ अनाथ पिण्डक नामक व्यापारी ने 18 करोड़ स्वर्ण मुद्राओं मंे राजा जैत (अवन्ती) से जैतवन विहार खरीदकर बुद्ध को भेंट किया था।

◆ इसके बाद महात्मा बुद्ध पावा गये तथा यहीं चंद नामक लुहार ने इन्हें सुकरमद्दव नामक खाद्य पदार्थ खाने को दिया जिससे इन्हें रक्तातिसार नामक बीमारी हो गई। (बौद्ध धर्म महात्मा बुद्ध)

◆ 483 ई.पू. कुशीनगर (आधुनिक सिद्धार्थ नगर यूपी) में इनकी मृत्यु हो गई।

◆ महात्मा बुद्ध ने सर्वाधिक समय 21 वर्ष श्रावस्ति में व्यंतीत किये तथा अपना अन्तिम वर्षाकाल वैशाली मंे व्यतीत किया।

बौद्ध संगीतियाँ

प्रथम बौद्ध संगीति

◆ प्रथम बौद्ध संगीति बुद्ध की मृत्यु के तुरन्त पश्चात् राजगृह की सप्तपर्णि गुफा में अजातशत्रु के संरक्षण में बुलायी गयी थी।

◆ महाकश्यप इस संगीति के अध्यक्ष थे।

◆ इसके उपालि द्वारा विनयपिटक तथा आनंद द्वारा सुतपिटक का संकलन किया गया।

द्वितीय बौद्ध संगीति

◆ द्वितीय बौद्ध संगीति बुद्ध की मृत्यु के सौ वर्ष पश्चात् (38380) में वैशाली में आयोजित की गई।

◆ कालाशोक के संरक्षण में हुई इस संगीति में 700 भिशुओं ने भाग लिया या अतः यह संगीति सप्तशतिका भी कहलाती है।

◆ इस संगीति की अध्यक्षता सब्बकामी (सर्वकामिनी) ने की थी।

◆ इस समय बोद्ध धर्म दो भागों में विभक्त हो गया था

  1. महासंधिक

◆ मगघ तथा वैशाली के बौद्ध भिशु इस धर्म में आचार्य पद्धतिका समावेश चाहते थे, इसका प्रवर्तक महाकश्यप को माना जाता है।

◆ यह पूर्वी बौद्ध शाखा कहालाती थी।

  1. स्थविरवाद

◆ ये बौद्ध धर्म की पुरानी परम्परा को ही बनाये रखना चाहते थे।

◆ पश्चिमी बौद्ध शाखा स्थविरवाद के प्रवर्तक महाकाच्चायन थे।

◆ इसी शाखा की परम्पराये थेरवाद कहालती है।

◆ इसी शाखा से सर्वस्तिवाद नामक उपशाखा बनी जिसके प्रवर्तक राहुलभद्र थे।

◆ चूँकि ये बोैद्ध ग्रन्थों की बजाय टीकाओं को ज्यादा महत्त्व देते थे (टीका विभाषा) अतः वे वैभेषिक कहाये।

तृतीय बोद्ध संगीति

अशोक के शासनकाल में महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण के 236 वर्ष पश्चात् 274 ई.पू. में यह संगीति आयोजित की गई।

◆ पाटलिपुत्र में हुई संगीति में अध्यक्ष मौगलिपुत्र तिस्त थे। तथा इसी संगीति में बौद्ध धर्म के मनोवैज्ञानिक तथा दाशनिक पक्ष में ग्रन्थ अभिधम्म पिटक का संकलन किया गया तथा विदेशों में दूत इसी संगीति के पश्चात् भेजे गये।

चतुर्थ बौद्ध संगीति

◆ यह संगीति कनिष्क के समय कश्मीर के कुण्डलवन में प्रथम शताब्दी में आयोजित की गई।

◆ इसके अध्यक्ष वसुमित्र तथा उपाध्यक्ष अश्वघोष थे।

◆ बौद्ध धर्म इस समय हीनयान तथा महायान दो शाखाओं में बंट गया।

◆ हीनयान पुरातनपंथी थे जबकि महायान बुद्ध की पूजा मूर्तियों के रूप में करना चाहते थे।

◆ कनिष्ठ महायान शाखा का समर्थक था। (बौद्ध धर्म महात्मा बुद्ध)

बौद्ध धर्म के दार्शनिक व विद्वान

◆ अश्वघोष – इन्होंने बुद्ध चरित की रचना की थी तथा बौद्ध धर्म का प्रचार वीणा बजाते हुए किया था।

◆ बुद्धघोष – इन्होंने विशुद्विमग्ग की रचना की थी तथा इस ग्रंथ को त्रिपिटकों की कँुजी कहा जाता है।

◆ दिग्नाम – तर्कशास्त्र के इस प्रणेता को मध्यकालीन भारत में न्याय का जनक कहते है।

◆ धर्मकीर्ति – इन्होनें ज्ञान मीसासात्मक नाम ग्रन्थ लिखा तथा डा. स्टेचबात्सकी ने इन्हें भारत का कांट कहा है।

◆ मैत्रेनाथ – बौद्ध धर्म में विज्ञानवाद का जनक इन्हें ही माना जाता है ।

◆ नागार्जुन – शून्यवाद के प्रणेता।

◆ मध्यमिका मार्ग/सापेक्षवाद इन्हीं के कारण प्रसिद्धि पा सका है।

◆ बौद्ध धर्म के 8 महास्थान है

 बौद्ध धर्म के मुख्य स्थान –  1. लुम्बिनी 2. बोघगया  3. सारनाथ   4.  कुशीनगर

गौण स्थान – 5. वैशाली 6.  राजगृह   7. संकिशा   8.

◆ बौद्ध धर्म में चार पशुओं को पवित्र माना गया है।

हाथी – बुद्ध के गर्भ में आने का प्रतीक

वृषभ – योवन अवस्था का प्रतिक

अश्व – गृह त्याग का प्रतिक

सिंह – कठोर तपस्या तथा ज्ञान प्राप्ति का प्रतिक

मराठा साम्राज्य शिवाजी का उत्कर्ष 

महिला सशक्तिकरण 

ब्रिटिश व उपनिवेशकालीन भारतीय अर्थव्यवस्था 

भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकार 

गिलोय के औषधीय गुण एवं फायदे 

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